Thursday , November 23 2017
Home / फेसबुक से

फेसबुक से

भारत का भयावह भ्रम

पेंच यहीं है और गहरा है. भारत का सबसे बड़ा भ्रम, जो है सभी समस्याओं की जड़ में. आप किसी पुराने से मकान के पास से रोज गुजरते हैं. लोग इसके खिड़की दरवाजे तोड़कर ले जाते हैं, आपको कोई फर्क नहीं पड़ता. लोग यहाँ गन्दगी करते हैं, आपको क्या. आपको …

विस्तार से पढ़े»

हिन्दू-मुस्लिम एकता का क्या अर्थ है ?

मुझे हिन्दू-मुस्लिम एकता में कोई रुचि नहीं. मुझे नहीं लगता कि इस विषय का अलग से महिमामंडन होना चाहिए.इस देश में रहने वाले सभी समूहों को प्रेम से रहना चाहिए.और देश को मजबूत करना चाहिए, जीवन को समृद्ध बनाना चाहिए.  मैं समझता हूँ कि यह इस देश में एक बड़ा …

विस्तार से पढ़े»

शिक्षक आज भी आख़िरी और एकमात्र उम्मीद है,

यह मैं यकीनन कह सकता हूँ. कैसे ? हम जब छोटे थे तब भी पटवारी, तहसीलदार, चिकित्सक और थानेदार द्वारा रिश्वतें लिए जाने की बातें सुनते थे पर हमारी स्कूल के शिक्षक तब ईमानदारी से हमें पढ़ाई करवाते थे. समय पर स्कूल आते थे, भारत के सपूतों की कहानियां सुनाते …

विस्तार से पढ़े»

किसानों के लिए कैसा होगा भारत का बजट ? हमारी नजर में.

केन्द्रीय बजट में किसानों को इस वर्ष आठ लाख करोड़ के ऋण. लेकिन ऐसा भी हो सकता था- भारत में छः लाख गाँव हैं. एक गाँव में एक वर्ष में खेती के लिए औसतन एक करोड़ रूपये की जरूरत पूरे गाँव को पड़ती है. इसमें डीजल, बीज, खाद और दवाइयां …

विस्तार से पढ़े»

करदाता कौन ? परिभाषा मत बदलो यार !

करदाता कौन ?  आज फिर परिभाषा पर लिखने का मन हो आया. इस बजट में करदाताओं के लिए क्या रहा ? ऐसा वाक्य आते ही लगता है कि करदाता वही है जो आयकर या income tax , corporate tax या निगम कर देता है या फिर Excise duty,Custom duty, VAT …

विस्तार से पढ़े»

सनसनीखेज (Sensational) पत्रकारिता के दुष्प्रभाव (side effects)

मीडिया की कई ख़बरें सनसनी sensation  के चक्कर में, अक्सर सच्चाई को ढक देती है. कई बार समाज का, किसी व्यक्ति, या संस्था का बड़ा नुकसान भी हो जाता है. दुष्कर्म, बलात्कार, दुर्घटना, धोखाधड़ी, रिश्वत आदि की ख़बरें.  हम रोज सुबह ऐसी ख़बरें पढते हैं. अनजाने में ही सही शीर्षक …

विस्तार से पढ़े»

रेल बजट की जगह अगर कृषि और लघु उद्योग का बजट होता !

रेल बजट को देखते हुए सपना आया कि काश ! इसकी जगह कृषि बजट पेश हो रहा होता.  ऐसा नहीं है कि किसान पुत्र होने के कारण मैं खेती और किसान को लेकर ज्यादा आसक्त हूँ. हकीकत यह है कि भारत में रहने वाले दो तिहाई लोगों(59%) का खेती प्रत्यक्ष व्यवसाय है, योजना …

विस्तार से पढ़े»

अकाल की कोई संभावना नहीं है, अगर.

अच्छी बारिश होने वाली है.अकाल की कोई संभावना नहीं है.अगर.अगर हम हर खेत और छत में बरसी बूंदों को सहेज लें.अगर हम सहेजे पानी से तक खेत की सींच लें जब अगली बारिश न हो या देर से हो. अगर हम अपने खेत की मिट्टी को टेस्ट करवाकर कम पानी में …

विस्तार से पढ़े»

कर्मस्थली को एक आदर्श धार्मिक तीर्थ बनायेंगे

जब ‘अभिनव नागौर’ ‘अभिनव राजस्थान’ और ‘अभिनव भारत’ की बातें करते हैं तो अभिनव शुरुआत उस जगह पर भी होनी चाहिए, जहां मैं अपने परिवार के साथ रहता हूँ. जहां स्थाई निवास है. कुछ चार साल पहले मैंने इसी भाव से नगरपालिका चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाई थी कि मीरां की इस …

विस्तार से पढ़े»