Wednesday , July 26 2017

आपके जीते से जीत है, आपके हारे हार, देश की।

हे मेरे शिक्षक मित्रों मैं जानता हूँ कि आप में से अधिकांश शिक्षक इसलिए हैं कि आप डॉक्टर, इंजीनियर नहीं बन सके। आप आई.ए.एस. या आर.ए.एस. नहीं बन पाये। हो सकता है आप तो थानेदार बनने को भी राजी थे, पर न बन पाये। आपके माँ-बाप का सपना भी आपको …

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राजस्थान के शिक्षक करेंगे मौन क्रांति

एक प्यारी सी कल्पना, जिसका पूरा होना मुश्किल नहीं है। एक प्यारा सा सपना, जिसका साकार होना ही अन्तिम समाधान है। दृश्य 1 जयपुर जिले का एक उच्च प्राथमिक विद्यालय, रामपुरा गाँव का। अभी-अभी क्षेत्र के तहसीलदार औचक निरीक्षण पर आये थे। गाँव के कई मनचले और स्वयंभू ‘नेता’ भी …

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प्रारम्भिक शिक्षा – ऐसी होंगी हमारी स्कूलें

अभिनव राजस्थान में प्रारंभिक शिक्षा को फिर से नींव मानकर कार्य शुरू किया जायेगा। नींव कमजोर हो तो मकान कैसे मजबूत हो सकता है। अभी तक तो स्वतंत्र भारत में यह कहा जा रहा था कि कई सरकारी भवनों की नींवें कमजोर रहने से वे जल्दी मरम्मत मांग लेते हैं, …

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उच्च शिक्षा – हमारे महाविद्यालय, हमारे विश्वविद्यालय

प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 10 तक) में जानकारियों की अनिवार्यता रहती है। एक सामान्य जागरूक नागरिक को लोकतंत्र की मजबूती के लिए और आर्थिक विकास के लिए इतना ज्ञान होना चाहिये। इस अनिवार्यता से विद्यार्थी की विभिन्न क्षेत्रों में क्षमता, अभिरुचि एवं उपयोगिता का भी अंदाज लग जाया करता है। यह …

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पाठ्यक्रम, परीक्षा एवं प्रवेश

शिक्षा का शाब्दिक अर्थ है, समाज के लिए वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान का सृजन। ऐसे नागरिकों का निर्माण जिनकी समाज को, देश को आवश्यकता है। सीधा सा अर्थ। इससे आगे उलझन ही उलझन है और हमने एक ऐसा जाल बुन भी लिया है, जिसका ओर-छोर हमें …

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अभिनव राजस्थान के बढ़ते कदम 5

मेड़ता में अच्छाई की मार्केटिंग (19 जून 2011) हमारा यह स्पष्ट मानना है कि अच्छाई भी फैलायी जानी चाहिये। केवल बुराई को कोसना काफी नहीं है। अंधेरे को कोसने की बजाय दिया जलाना अधिक सार्थक होता है। अंधेरा तभी खत्म होगा। 25 दिसम्बर 2011 को मेड़ता शहर में, मीरां की …

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धारणाएँ बदलें ताकि समाधान निकले

        अभिनव राजस्थान में हम जन जागरण का मूल कार्य करेंगे। और जन जागरण के लिए हमें कई धारणाओं को तोड़ना होगा, या मोड़ना होगा। क्योंकि जब अगर हमारी किसी विषय पर धारणा ही गलत बन चुकी है, तो हम समस्या के समाधान तक नहीं पहुँचेंगे। आज लगभग प्रत्येक विषय …

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सर्व शिक्षा या शिक्षा का सवा सत्यानाश

क्या सोचा था, क्या हो गया ?             देश की आजादी के पहले से ही नीति निर्धारकों ने शिक्षा के महत्व को बार-बार रेखांकित किया था। सम्पूर्ण साक्षर भारत बनाने के पीछे उनका उद्देश्य भी स्पष्ट था। वे लोकतंत्र की मजबूती के लिए शिक्षा का प्रसार …

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‘अभिनव राजस्थान’ अभियान पर लेखक एवं समाजकर्मी सुरेश पंडित की टिप्पणी

प्रिय अशोक जी,     ‘रोचक राजस्थान’ बड़ी रुचि के साथ पढ़ता रहता हूं पर आपको पत्र लिखने का अवसर पहली बार जून 2011 का अंक पढ़ कर आया है। आपके लेख- ‘देश किस ओर’ तथा ‘दिल्ली का ड्रामा’ इसलिये विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं क्योंकि इनमें भ्रष्टाचार के मुद्दे को …

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मोबाइल की महामारी

क्या कारण है कि आज लोग पागलों की तरह मोबाइल लेकर घूम रहे हैं? जहाँ देखो, हाथ में मोबाइल थामे मर्द और औरतें खड़े हैं, बातें कर रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे जन्मों कि कोई प्यास थी जो अब बुझ रही है। वरन् इस बीमारी से कौन दो चार होना चाहेगा ? एक दशक के बाद वैज्ञानिक बताने लगे हैं कि दिन में 30 मिनट से ज्यादा बात करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। कई सालों बाद गुटखे के बारे में पता चला था तब तक नई और पुरानी …

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