Saturday , August 17 2019

‘अभिनव राजस्थान’ अभियान पर लेखक एवं समाजकर्मी सुरेश पंडित की टिप्पणी

प्रिय अशोक जी,     ‘रोचक राजस्थान’ बड़ी रुचि के साथ पढ़ता रहता हूं पर आपको पत्र लिखने का अवसर पहली बार जून 2011 का अंक पढ़ कर आया है। आपके लेख- ‘देश किस ओर’ तथा ‘दिल्ली का ड्रामा’ इसलिये विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं क्योंकि इनमें भ्रष्टाचार के मुद्दे को …

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मोबाइल की महामारी

क्या कारण है कि आज लोग पागलों की तरह मोबाइल लेकर घूम रहे हैं? जहाँ देखो, हाथ में मोबाइल थामे मर्द और औरतें खड़े हैं, बातें कर रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे जन्मों कि कोई प्यास थी जो अब बुझ रही है। वरन् इस बीमारी से कौन दो चार होना चाहेगा ? एक दशक के बाद वैज्ञानिक बताने लगे हैं कि दिन में 30 मिनट से ज्यादा बात करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। कई सालों बाद गुटखे के बारे में पता चला था तब तक नई और पुरानी …

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‘अभिनव राजस्थान’ अभियान पर शिक्षक, कवि एवं चिंतक कुमार वर्मा की टिप्पणी

राजस्थान प्रदेश का जागरूक नागरिक होने के नाते मेरी ‘अभिनव राजस्थान’ के विचार से कमोवेश परिचितता बनी रही है। मैं आंदोलन शब्द से बचना चाह रहा हूं। विचाररहित एवं स्तरहीन नेतृत्व ने आंदोलन शब्द की महिमा, उसके गौरव और उसकी गंध को तकरीबन नष्ट कर डाला है।           “अभिनव राजस्थान” …

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दिल्ली का ड्रामा

मेरे एक पहचान वाले सरकारी डॉक्टर फोन करते हैं और कहते हैं कि हम सबको बाबा रामदेव का समर्थन करना चाहिये। ये महाशय, डॉक्टर साहब, अस्पताल कम ही जाते हैं, यह मैं जानता हूँ। मुफ्त की तनख्वाह उठाते हैं। लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर परेशान है। तभी एक कपड़ा व्यापारी मुझे …

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शादियों पर फिजूलखर्ची – उत्सव बन गया अभिशाप

घर में शादी का जिक्र आते ही सारा परिवार कभी चहकने लगता था। बूढ़े-जवान-बच्चे, सभी शादी में अपने-अपने हिस्से की खुशी ढूंढ़ने लगते थे। छ: महीने पहले ही गेहूँ साफ होने लगते थे, दर्ज़ी दो महीने पहले घर बैठ जाता था। बहन-बुआ, महीने भर पहले पीहर बुला ली जाती थी। …

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अभिनव राजस्थान के बढ़ते कदम 4

जैसे-जैसे 25 दिसम्बर की तारीख नजदीक आ रही है, तैयारियों को गति देने के प्रयास हो गये हैं। समाचार पत्र नियमित हो गया है। जून 2011 से दिसम्बर 2011 तक सात अंकों में सात विषयों पर हमारी रणनीति स्पष्ट होती जायेगी। पहली बार एक सकारात्मक कार्यक्रम को इतने बड़े स्तर …

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मृत्युभोज : एक वीभत्स कुरीति

यह लेख लिखते हुए शर्म महसूस हो रही है। कई बार ऐसा लगता है, अज्ञानता वरदान है। इग्रोरेन्स इज ब्लिस। लेकिन जाने अनजाने में कई चीज़ें ज्ञान के प्रकाश में आ जाती हैं और पीड़ा देती हैं। ऐसी ही एक पीड़ा देने वाली कुरीति है -मृत्युभोज। मानव विकास के रास्ते …

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अभिनव समाज – विकास की ज़मीन

अभिनव राजस्थान के निर्माण के लिए हमने सात क्षेत्र महत्त्वपूर्ण माने हैं। इन्हें हमने विकास राग के सात सुर माने हैं, विकास के इंद्रधनुष के सात रंग माने हैं। ये हैं – समाज, शिक्षा, शासन, कृषि, उद्योग, प्रकृति और संस्कृति। इस अंक से हम क्रमश: एक-एक विषय पर चिंतन करेंगे। …

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मेरी आवाज सुनो

नक्कारखाने में तूतियों की आवाज़ -राजस्थान के किसान, कारीगर, अध्यापक और व्यापारी मैं राजस्थान का किसान हूँ। कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि एक बीघा में 1 लाख रुपये की पैदावार कम पानी, कम वर्षा में भी हो सकती है। वे राजस्थान जैसे भूगोल वाले इजराइल देश का उदाहरण भी देते …

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देश किस ओर ? अराजकता या नवनिर्माण ?

आज मूल प्रश्र यही है, जिस पर गम्भीरता से मंथन-चिंतन होना चाहिये। हल्की-फुल्की-छिछली बातों से ऊपर उठकर इस पर विचार करना चाहिये, कि आखिर आज के हालतों को देखते हुए भारत किस तरफ जा रहा है। क्या हम वाकई में एक विश्वशक्ति बनने जा रहे हैं या हमने ठगने के …

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