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डॉक्टर बन जायेंगे फिर भगवान – ‘अभिनव राजस्थान’ में

एक अधूरा सपना

एक कस्बे के सरकारी अस्पताल में सभी डॉक्टर अत्यंत सेवा भाव से जुटे हैं. जैसे वे किसी मिशन में काम करते हैं. वे समर्पित होकर अपने मरीजों को सँभालते हैं. किसी भी मरीज से कोई फीस नहीं लेते हैं. वे अपने वेतन में खुश हैं. कस्बे के लोग भी उनकी बहुत इज्जत करते हैं. उनमें भगवान का रूप देखते हैं.

क्या कोई सपना है ? भारत में ऐसा कभी हो सकता है ? जी हाँ, हो सकता है. होना ही चाहिए. यही तो हमने सोचा था, जब हम आजादी के बाद ‘अपने’ भारत की व्यवस्था बना रहे थे. आज उन व्यवस्थाओं को संभाल नहीं पा रहे हैं, तो साधारण सी बातें भी आदर्श लगने लगी हैं, सपना लगने लगी हैं. हमने यही तो सोचा था कि हमारे कस्बों में अस्पताल होंगे, जो साधारण बीमारियों से नागरिकों को मरने नहीं देंगे. हमने अनेक मेडिकल कॉलेज खोले थे, जिनमें डॉक्टर तैयार कर उन्हें समाज की सेवा के लिए भेजना था. यही तो मूल अजेंडा था. फिर क्या हुआ कि आज डॉक्टर का नाम आते ही एक ‘दुकानदार’ का रूप सामने आ जाता है, जिसका एक ही लक्ष्य मरीज से धन वसूलना है. सरकारी अस्पताल का नाम आते ही एक गंदे से भवन का ख्याल आ जाता है, जहाँ पर जाकर स्वस्थ आदमी भी उल्टा बीमार पड़ सकता है. कहाँ गडबड हो गयी कि अब अस्पताल में सेवा की भावना की बात करना एक मजाक हो गया है ? क्या डॉक्टर और अस्पताल को फिर उस आदर्श स्थान तक फिर पहुंचाया जा सकता है?

हमारे माने तो यह आसान काम है. थोड़ी सी राजनैतिक इच्छाशक्ति हो तो यह बिलकुल संभव है. ‘अभिनव राजस्थान’ में ऐसा ही होगा. क्योंकि ‘अभिनव राजस्थान’ की रणनीति ही ऐसी है कि वह व्यवहार में खरी उतरने वाली है. क्योंकि ‘अभिनव राजस्थान’ में समस्या के समाधान के लिए धारणाएं बदलने का काम होना है. धारणाएं गलत होने से समाधान नहीं निकलते हैं, बल्कि समस्या और गहरी हो जाती है. जबकि सही धारणा समाधान के दरवाजे खोल देती है.


गलत धारणाएं


तो डॉक्टरों और अस्पतालों के बारे में क्या गलत धारणाएं हैं ? दो धारणाएं इनमें प्रमुख हैं. एक तो यह कि हमने डॉक्टरों को अपने समाज से बाहर के व्यक्ति मान लिया है. हम भूल ही गए हैं कि ये लोग भी हमारे समाज से ही आये हैं. हम भूल गए हैं कि अगर उनमें कोई कमी व्यापक स्तर पर है, तो कहीं न कहीं यह कमी समाज से ही आयी है. समाज को उस कमी को दूर करना होगा. अगर वे पैसे के पीछे अंधे हो रहे हैं, तो उसका कारण हमारे समाज में ही है. समाज में धन का मूल्य ज्ञान और सेवा से अधिक है, तो डॉक्टर क्या करेगा. अंधाधुंध तरीके से पैसे कमाएगा. परिवार के लिए वे सुविधाएँ जुटाएगा, जिनके चलते समाज उसकी ज्यादा इज्जत करे. परिवार की ‘मांगों’ को पूरा करेगा, जो समाज के प्रभाव से बढ़ती जाती हैं. उसे अब पैसे के अलावा कुछ नहीं दिखेगा. उसे नहीं दीखता कि सामने खड़ा मरीज गरीब है या अमीर. बस उसे तो पैसे की दरकार है, चाहे मरीज कहीं से उधार लाये. उसके अंदर का ‘सेवक’ धीमी मौत मर जाता है  और उसके अंदर एक ‘लालची’ शैतान घर कर जाता है.

दूसरे हम केवल डॉक्टरों को दोष देकर रह जाते हैं, जबकि इस बात पर कम मंथन होता है कि व्यवस्था में क्या खामियां हैं, जो डॉक्टरों को आदर्श तरीके से काम करने से रोकती हैं. चिकित्सा व्यवस्था में ऐसी कौनसी कमियां हैं, जो उनको गलत तरीके आजमाने पर मजबूर कर देती हैं. जो उन्हें नाकारा बना देती हैं. जो उनका ‘सेवा’ से मोह भंग कर देती हैं. जिनके कारण उनका इस व्यवस्था से अपनापन कम हो जाता है, मोह कम हो जाता है. या फिर वे इस व्यवस्था को छोड़ कर अपनी ‘दुकान’(क्लिनिक) सजा लेते हैं, जहाँ वे अपनी मर्जी से मरीजों का अनावश्यक जांचों या ऑपरेशनों के नाम पर अथाह शोषण करते हैं.

हम विचार करें. क्या हो गया है उस मेडिकल कॉलेज के होनहार विद्यार्थी को जो कभी आदर्श की बाते करता था ? क्यों यह समाज की प्रतिभा समाज के लिए इतनी घातक साबित हो रही है ? जिसे समाज को संभालना था, वही समाज को नुकसान क्यों पहुंचा रहा है ? बाड़ ही खेत को क्यों खा रही है ? क्या ये सभी व्यक्ति, जिन्हें हम डॉक्टर कहते हैं, बुरे हैं ? या समाज के माहौल ने इनको बुरा होने पर विवश कर दिया है ? इस विकराल स्थिति से इन होनहारों को कैसे बाहर लाया जा सकता है ? किस तरीके से उन्हें बाहर निकालें ? है कोई तरीका, समाधान ? हाँ तरीका है. ‘अभिनव राजस्थान’ में.  

‘अभिनव राजस्थान’ में

‘अभिनव राजस्थान’ की कार्ययोजना पर जब हम काम करेंगे तो एक बड़ा बदलाव चिकित्सा सेवा में भी आएगा. प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को इस प्रकार चलाया जाएगा कि हमारे डॉक्टर फिर से उत्साहित होकर अपना कर्त्तव्य निभाएंगे. वे फिर से चिकित्सा सेवा को उस स्थिति में पहुंचा देंगे, जहाँ हम इस सेवा को देखना चाहते हैं. हम इस स्थिति को लाने के लिए ये परिवर्तन करेंगे.
  1. जैसा कि हम बार बार यह कहते हैं कि समाज की जमीन को तैयार करना हमारी पहली सीढ़ी होगी. क्योंकि समाज से ही तो डॉक्टर अपनी पहचान को देखता है. समाज के ही तो मूल्यों पर वह खरा उतरना चाहता है. समाज की कमियां और गलत मूल्य ही तो उसे भटका देते हैं. इसलिए हम व्यापक स्तर पर समाज में बदलाव करेंगे. ‘अभिनव समाज’ बनायेंगे. समाज में धन की बजाय सेवा, सादगी और ज्ञान का मूल्य अधिक रखेंगे. सेवाभावी और सादे लोगों का पूरे प्रदेश में खूब सम्मान होगा. तभी यह पैसे के पीछे भागने की बीमारी कम होगी. चिकित्सा विज्ञान की भाषा में यह ‘प्रीवेंटिव एफ्फर्ट’ होगा.

  2. ‘अभिनव राजस्थान’ में किसी भी डॉक्टर को गाँव में नहीं लगाया जाएगा. हमारी योजना में केवल विकास खंड के स्तर पर एक अस्पताल (सामुदायिक अस्पताल) होगा, जो पूर्णतया सुसज्जित होगा. जांच और चिकित्सा की सभी मूलभूत सुविधाएं यहाँ होंगी. नए डॉक्टर यही से अपनी सेवा शुरू करेंगे. इससे उनको अपने ज्ञान के उपयोग का पूरा मौका मिलेगा. या कहिये उन्हें यहाँ पर ‘जॉब सेटिस्फेक्सन’ मिलेगा. वर्ना गाँवों के बिना सुविधाओं के अस्पतालों में वे प्रारंभ से ही वे सब कार्य नहीं कर पाते हैं, जो उन्होंने सीखा है. शुरुआत में ही वे सरकारी व्यवस्था से बिदक जाते हैं. डॉक्टरों के अभी गाँवों में नहीं जाने के पीछे यह एक प्रमुख कारण है. लेकिन पहली पोस्टिंग कस्बे में होगी तो वे खुशी खुशी वहां चले जायेंगे. एक कस्बे में जाने पर उन्हें अचानक शहर से गाँव में जाने का झटका भी नहीं लगेगा.

  3. विकास खंड के अस्पताल ( सी एच सी) पर आठ वर्ष तक काम करने के बाद योग्यतानुसार डॉक्टरों को पहला प्रोमोशन मिलेगा. इसके तहत वे अब जिला अस्पतालों में कार्य करेंगे. इस बीच वे कोई विशेष तकनीक या डिग्री हासिल करना चाहेंगे तो उन्हें इसका भी मौका मिलेगा, जिससे वे अपने आपको अपडेट रख सकेंगे. हमारे जिला अस्पतालों का कार्य ‘अभिनव राजस्थान’ में विशेषज्ञता आधारित होगा. वहां प्रत्येक बीमारी के विशेषज्ञ ही रहेंगे. इससे मरीजों को अपने जिले में वे सभी चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी, जो वर्तमान में संभाग स्तर पर मिलती हैं. इस व्यवस्था से डॉक्टर और मरीज, दोनों का फायदा होगा. डॉक्टरों को विशेषज्ञता का आनंद मिलेगा, तो मरीज को कम खर्च और सुलभ चिकत्सा का.

  4. जिला अस्पताल में आठ वर्ष के पश्चात फिर योग्यतानुसार एक प्रोमोशन होगा, जिसके तहत डॉक्टर अब संभाग के अस्पतालों में जायेंगे. इस बीच वे फिर कोई तकनीक या नया ज्ञान हासिल कर सकेंगे. संभाग स्तर के अस्पतालों में केवल अत्यंत गंभीर बीमारियों का ही ईलाज होगा. ये अनुभवी डॉक्टर अब ऐसी ही बीमारियों का ईलाज करेंगे.
दूसरी तरफ डॉक्टरों के बच्चे भी जैसे जैसे बड़े होते हैं, उनकी शिक्षा की आवश्यकताएं बढती जाती हैं. इस नयी व्यवस्था में ये आवश्यकताएं पूरी होती जायेंगी, क्योंकि परिवार को समय के साथ बड़े शहर में रहने का मौका मिलेगा. वहीँ समय पर प्रोमोशन होने से डॉक्टरों के जीवन में उत्साह रहेगा. एक गति बनी रहेगी, जो उन्हें अपने कार्य में संतुष्टि देगी. जो उन्हें अपने कार्य के प्रति सम्मान से भरा रखेगी, समर्पित रखेगी. और यही समर्पण उन्हें सेवा के भाव से भर देगा. समाज को कुछ देने के भाव से भर देगा.
  1. ‘अभिनव राजस्थान, में चिकित्सा व्यवस्था में दूसरे विभागों के अधिकारी दखल नहीं देंगे. एस डी एम या कलेक्टर जैसे अधिकारी अस्पतालों का निरीक्षण नहीं करेंगे और डॉक्टरों को डांटने या फटकारने के उन्हें अधिकार नहीं होंगे. उन्हें अपने आपको अधिक ‘देशभक्त’ कहलवाने का कोई भ्रम नहीं रखने दिया जाएगा. विकास खंड के सामुदायिक अस्पताल से लेकर जयपुर के महानिदेशक तक सभी अधिकारी डॉक्टर ही होंगे.

  2. प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में ‘अभिनव शिक्षा’ और प्रदेश की उत्पादन की व्यवस्था में ‘अभिनव कृषि और उद्योग’ के माध्यम से बड़े परिवर्तन होंगे. शिक्षा और रोजगार के अधिक और अच्छे अवसर होने पर डॉक्टरों को भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंताएं नहीं रहेंगी और वे मन लगाकर निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा में लीन हो जायेंगे.

  3. डॉक्टरों के स्थानांतरण प्रत्येक चार वर्ष के बाद एक निश्चित नीति के तहत होंगे. लेकिन उनके खिलाफ अनुशाश्नात्मक कार्यवाही मनमाने ढंग से नहीं होगी. इसके लिए उचित और स्पष्ट कारण दिए जाने पड़ेंगे. न ही सजा के नाम पर उनका समय से पहले स्थानांतरण किया जा सकेगा.

  4. समाज के विभिन्न मंचों पर डॉक्टर, मुख्य अतिथि या अध्यक्ष के तौर पर दिखाई देंगे. इससे उनको समाज में अपनी विशेष भूमिका और दायित्व का बराबर अहसास रहेगा.

  5. समय समय पर डॉक्टरों के साथ स्वास्थ्य मंत्री की बैठकें हुआ करेंगी, ताकि डॉक्टर अपने सुझावों और समस्याओं से उन्हें अवगत कराते रहेंगे. इससे उनमें विभाग के प्रति अपनेपन का भाव बढ़ता रहेगा.
इस प्रकार की व्यवस्था जब ‘अभिनव राजस्थान’ में बन जायेगी, तभी समाज के ये होनहार आगे बढ़ कर समाज की सेवा करेंगे. वे फिर ‘भगवान’ का रूप बन जायेंगे. आखिर वे भी इंसान हैं और उनकी भी भावनाएं हैं. इन भावनाओं को दरकिनार कब तक किया जाता रहेगा और उन्हें प्रत्येक मंच से दोषी माना जाता रहेगा ? कब तक राजनेता, राजस्व अधिकारी और मीडिया उन्हें खुल्लेआम भांडते रहेंगे और इस व्यवहार के बदले में उनसे सेवा की अपेक्षा करेंगे ?  शिक्षा और चिकित्सा किसी भी विकसित समाज के लिए संवेदनशील विषय होते हैं. इन्हें हल्के में लेने की भूल को अब हमें सुधार लेना चाहिए.

About Dr.Ashok Choudhary

नाम : डॉ. अशोक चौधरी पता : सी-14, गाँधी नगर, मेडता सिटी , जिला – नागौर (राजस्थान) फोन नम्बर : +91-94141-18995 ईमेल : ashokakeli@gmail.com

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