Wednesday , April 8 2020

तीस दिसंबर का मेड़ता सम्मेलन – एक वैचारिक क्रांति की शुरुआत

डॉ. अशोक चौधरी तीस दिसम्बर के रोज राजस्थान के बीचों बीच मीरां की नगरी में एक विशेष सम्मेलन होगा. यह सम्मेलन विशेष ही होगा. कई मायनों में विशेष होगा.इसमें भाग लेने वालों की दृष्टि से, इसमें रखे जाने वाले विषयों की दृष्टि से. मैंने राजस्थान में अभी तक ऐसे किसी सम्मेलन के …

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थू बोल तो सरी, जुबान खोल तो सरी

डॉ. अशोक चौधरी देश में इतना कुछ घट रहा है और आप अभी भी सड़क के किनारे खड़े हैं. तमाशे देख रहे हैं. सांसदों–विधायकों–मंत्रियों के तमाशे हो रहे हैं, अफसरों के तमाशे हो रहे हैं. पैसे वालों के तमाशे हो रहे हैं. देश को लूटने में सरपंच– ग्रामसेवक– पटवारी से …

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असली आजादी की आहट ……..

15 अगस्त पर विशेष  डॉ. अशोक चौधरी  (94141-18995) एक और पन्द्रह अगस्त आ गया। बचपन से सुनते आये हैं कि इस दिन भारत देश को आजादी मिली थी। हमें यह बताया गया है कि गांधी और नेहरु ही इस आजादी के नायक थे। तब यह नहीं बताया गया था कि …

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उत्तरी राजस्थान में ‘अभिनव राजस्थान अभियान’

पिछले अंक में हमने राजस्थान के दक्षिण अंचल के भ्रमण का वर्णन किया था. इस बार हम अभियान के प्रति जागरूकता के प्रसार के लिए राजस्थान के उत्तरी अंचल में थे. दक्षिण के पहाड़ी क्षेत्र की तुलना में यहाँ रेतीला धरातल है. एकदम विपरीत स्थिति. दक्षिण में वनस्पति की भरमार …

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बाजरा-मक्का-ज्वार खाइए

राजस्थान को स्वस्थ और समृद्ध बनाइये कई चीजें हमारे जीवन में क्यों हैं, इसका कोई पुख्ता कारण नहीं होता है. बस हम यूँ ही आदतन उनसे चिपके  रहते हैं. चिपके इसलिए रहते हैं क्योंकि हमसे पहले के लोग भी ऐसा करते थे. वैसे भी हम जीवन को हलके में लेते हैं, …

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विश्व तीर्थ ‘खेजड़ली’

पहले ऐतिहासिक घटना संक्षेप में                         वर्ष १७३०. जोधपुर के शासक अभयसिंह को अपने महलों के विस्तार के काम के लिए चूना पकाना था. इसके लिए लकड़ी की आवश्यकता थी. अधिक मात्रा में लकड़ी, जोजरी नदी के किनारे खेजड़ली क्षेत्र में मिल सकती थी, क्योंकि प्रकृतिप्रेमी बिश्नोई हरे पेड़ों को नहीं …

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राजस्थान का मरुस्थल (धरती धोरां री)

राजस्थान सामान्य ज्ञान शृंखला प्रदेश की सतह पर, विशेष रूप से अरावली के पश्चिम में, एक विशिष्ट प्रकार की संरचना आपको दिखाई देगी, जो रेत के फैलाव के कारण बनी है. रेत यानि ‘मरू’ या मरी हुई मिट्टी. ऐसी मिट्टी जिसमें ऐसे उपजाऊ तत्वों की कमी हो, जो चावल और …

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‘अभिनव राजस्थान अभियान’ गाँवों की ओर

पिछले दिनों मेड़ता तहसील में ‘अभिनव राजस्थान अभियान’ द्वारा चयनित गाँवों के दौरों से बहुत कुछ इस व्यवस्था के बारे में जानने को मिला. जयपुर से इन गाँवों की दूरी छः दशकों की आजादी के बाद भी कितनी है, इसे हमने प्रत्यक्ष महसूस किया. सरकारी विज्ञापनों और घोषणाओं का कितना …

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क्या ‘अभिनव राजस्थान’ कभी बन पायेगा ?

एक  सामान्य भारतीय या राजस्थानी व्यक्ति कहेगा कि यह संभव ही नहीं है. कुछ  नहीं बदल सकता, सब ऐसे ही चलेगा. वह मान ही नहीं सकता कि इस देश में, इस प्रदेश में कुछ अच्छा हो सकता है. रोज के अखबार भी उसकी इस धारणा को मजबूत करते रहते हैं. …

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दक्षिणी राजस्थान का दौरा

‘अभिनव राजस्थान अभियान’ के तहत हमने राजस्थान के 35 कस्बों का चयन अपने विस्तृत अध्ययन के लिए कर रखा है. कस्बों का चयन इसलिए किया गया, क्योंकि अमूमन कस्बे, गाँव और शहर के बीच की कड़ी साबित होते रहे हैं. गांव और शहर, दोनों की झलक कस्बों में मिल जाया …

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